Budh Pradosh Vrat Katha: बुधवार त्रयोदशी (बुध प्रदोष) व्रत कथा

Budh Pradosh Vrat: अगर आप बुध प्रदोष व्रत रखते हैं और भगवान शिव और गणेश जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आप बुध प्रदोष व्रत की यह कथा अवश्य पढ़ें या सुनें, क्योंकि इस कथा के बिना बुध प्रदोष व्रत की पूजा अधूरी मानी जाती है।

Budh Pradosh Vrat Katha

Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi: प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। जब यह तिथि बुधवार को आती है, तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। बुधवार त्रयोदशी का व्रत बुद्धि, व्यापार, वाणी और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष फल देने वाला है। बुध ग्रह संवाद, तर्कशक्ति और व्यापार की सफलता का कारक माना जाता है। इस दिन प्रदोष व्रत करने से मानसिक स्पष्टता, विवेक और अध्ययन में मन लगता है। व्यापारियों को आर्थिक प्रगति मिलती है, नौकरी में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं और वाणी मधुर होने से सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं। यह व्रत छोटी-बड़ी परेशानियों को शांत करता है और मन को स्थिर बनाता है। विद्यार्थी, व्यापारी तथा वक्तृत्व-कला से जुड़े लोगों के लिए बुध-प्रदोष व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है।

बुधवार त्रयोदशी (बुध प्रदोष) व्रत कथा

बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत में केवल एक बार भोजन करना चाहिये। इसमें हरी वस्तुओं का प्रयोग किया जाना जरूरी है। यह व्रत शंकर भगवान का प्रिय व्रत है। इस दिन शंकर जी की पूजा धूप, बेल पत्रादि से की जाती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, सूत जी शौनकादि ऋषियों से बोले कि हे ऋषियों अब मैं आपको बुध त्रयोदशी प्रदोष की कथा सुनाता हूं, ध्यानपूर्वक सुनिये। प्राचीन काल की कथा है, एक पुरुष का नया नया विवाह हुआ था। वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लिवाने के लिए अपनी ससुराल पहुंचा और उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जाएगा । उस पुरुष के सास-ससुर ने साले-सालियों ने उसको समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष अपनी जिद से टस से मस नहीं हुआ। विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा।

पति-पत्नी बैलगाड़ी में चले जा रहे थे। एक नगर के बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी। पति लोटा लेकर पत्नी के लिए पानी लेने गया। जब वह पानी लेकर लौटा तो उसके क्रोध और आश्चर्य की सीमा न रही, क्योंकि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के लाये लोटे में से पानी पीकर हंस-हंसकर बतिया रही थी। क्रोध में आग-बबूला होकर वह उस आदमी से झगड़ा करने लगा। मगर यह देखकर आश्चर्य की सीमा न रही कि उस पुरुष की शक्ल उस आदमी से हू-ब-हू मिलती थी। हम शक्ल आदमियों को झगड़ते हुए जब काफी देर हो गई तो वहां आने-जाने वालों की भीड़ एकत्र हो गई, सिपाही भी आ गया।

सिपाही ने स्त्री से पूछा कि इन दोनों में से कौन सा आदमी तेरा पति है, तो वह बेचारी असमंजस में पड़ गई, क्योंकि दोनों की शक्ल एक-दूसरे से बिल्कुल मिलती थी। बीच राह में अपनी पत्नी को इस तरह लुटा देखकर उस पुरुष की आंख भर आई। वह शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा, कि हे भगवान आप मेरी और मेरी पत्नी की रक्षा करो। मुझसे बड़ी भूल हुई जो मैं बुधवार को पत्नी को विदा करा लाया। भविष्य में ऐसा अपराध कदापि नहीं करूंगा। उसकी वह प्रार्थना जैसे ही पूरी हुई कि दूसरा पुरुष अर्न्तध्यान हो गया और वह पुरुष सकुशल अपनी पत्नी के साथ अपने घर पहुंच गया। उस दिन के बाद पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत रखने लगे।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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