Shukra Pradosh Vrat Katha in Hindi: प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। जब यह तिथि शुक्रवार को आती है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। शुक्रवार त्रयोदशी का व्रत विशेष रूप से सौभाग्य, दांपत्य-सुख और भौतिक समृद्धि का दाता माना जाता है। शुक्र ग्रह प्रेम, सौंदर्य, वैभव और संपन्नता का प्रतिनिधि है। इस दिन प्रदोष व्रत करने से स्त्री-पुरुष दोनों को दाम्पत्य जीवन में प्रेम और समझदारी प्राप्त होती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है। लक्ष्मी-कृपा बढ़ती है और व्यापार-धन से संबंधित बाधाएं समाप्त होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है क्योंकि इससे सौभाग्य और जीवन में आनंद बढ़ता है।
शुक्रवार त्रयोदशी (शुक्र प्रदोष) व्रत कथा
शुक्रवार त्रयोदशी प्रदोष व्रत की पूजा विधि सोम प्रदोष के समान ही है इसमें श्वेत रंग तथा खीर जैसे पदार्थ ही सेवन करने का महत्व होता है। सूत जी बोले कि प्राचीन काल की बात है एक नगर में तीन मित्र रहते थे, तीनों में ही घनिष्ट मित्रता थी। उनमें एक राजकुमार पुत्र, दूसरा ब्राह्मण पुत्र, तीसरा सेठ पुत्र था। राजकुमार व ब्राह्मण पुत्र का विवाह हो चुका था सेठ पुत्र का विवाह के बाद गौना नहीं हुआ था।
एक दिन तीनों मित्र आपस में स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण पुत्र ने नारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि “नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।” सेठ पुत्र ने यह वचन सुनकर अपनी पत्नी लाने का तुरन्त निश्चय किया। सेठ पुत्र अपने घर गया और अपने माता-पिता से अपना निश्चय बताया। उन्होंने बेटे से कहा कि शुक्र देवता डूबे हुए हैं। इन दिनों बहु-बेटियों को उनके घर से विदा कर लाना शुभ नहीं है, अतः शुक्रोदय के बाद तुम अपनी पत्नी को विदा करा लाना। सेठ पुत्र अपनी जिद से टस से मस नहीं हुआ और अपनी ससुराल जा पहुंचा। सास-ससुर को उसके इरादे का पता चला। उन्होंने इसको समझाने की कोशिश की किन्तु वह नहीं माना। अतः उन्हें विवश हो अपनी कन्या को विदा करना पड़ा।
ससुराल से विदा होकर पति-पत्नी नगर से बाहर निकले ही थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और एक बैल की टांग टूट गयी। पत्नी को भी काफी चोट आई। सेठ पुत्र ने आगे चलने का प्रयत्न जारी रखा तभी डाकुओं से भेंट हो गई और वे धन-धान्य लूटकर ले गए। सेठ का पुत्र पत्नी सहित रोता पीटता अपने घर पहुंचा। जाते ही उसे सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्यों को बुलाया। उन्होंने देखने के बाद घोषणा की कि आपका पुत्र तीन दिन में मर जाएगा।
उसी समय इस घटना का पता ब्राह्मण पुत्र को लगा। उसने सेठ से कहा कि आप अपने लड़के को पत्नी सहित बहू के घर वापस भेज दो। यह सारी बाधाएं इसलिए आयी हैं कि आपका पुत्र शुक्रास्त में पत्नी को विदा करा लाया है, यदि यह वहां पहुंच जाएगा तो बच जाएगा। सेठ को ब्राह्मण पुत्र की बात समझ आ गई और अपनी पुत्रवधु और पुत्र को वापिस लौटा दिया। वहां पहुंचते ही सेठ पुत्र की हालत ठीक होनी आरम्भ हो गई। तत्पश्चात उन्होंने शेष जीवन सुख आनन्दपूर्वक व्यतीत किया और अन्त में वह पति-पत्नी दोनों स्वर्ग लोक को गए।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


