Tulsi Puja Mantra Jaap Niyam: हिन्दू धर्म तुलसी पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है, क्योंकि भारतीय संस्कृति में तुलसी को सबसे पवित्र और माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) का रूप भी माना गया है। इसे तुलसी देवी, वृंदा देवी या हरिप्रिया के नाम से भी पूजा जाता है। घर में तुलसी का पौधा मात्र एक पौधा नहीं, बल्कि शुभता, स्वास्थ्य, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। सुबह तुलसी में जल चढ़ाना न केवल धार्मिक दृष्टि से श्रेष्ठ माना गया है, बल्कि मानसिक शांति और शुद्ध वातावरण का कारण भी बनता है। लेकिन तुलसी पूजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है सही मंत्र का उच्चारण। आइए जानते हैं कि तुलसी माता को जल चढ़ाते समय कौन मंत्र बोलना चाहिए।
तुलसी पर जल चढ़ाते समय परंपरागत रूप से इन मंत्रों को बोला जाता है।
मुख्य मंत्र
“ॐ तुलस्या नमः।” या “ॐ तुलसीदेव्यै नमः।” यह अत्यंत लोकप्रिय मंत्र है, जो तुलसी को जल अर्पित करते समय बोला जाता है।
वृहद मंत्र
“तुलस्यै नमो नमः, तुलस्यै नमो नमः, हरिप्रिये नमो नमः, तुलसी माता नमो नमः।” अधिक विस्तृत रूप से यदि आप तुलसी-स्तुति के साथ जल चढ़ाना चाहें, तो यह मंत्र सर्वोत्तम माना जाता है।
तुलसी स्तुति मंत्र
“वृन्दायै तुलसीदेव्यै प्रियम् हरिवल्लभे। यत् त्वां पूजयते नित्यं पापं तस्य न विद्यते॥” यह मंत्र तुलसी माता की कृपा प्राप्त कराने वाला माना गया है।
“महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आदि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते” मंत्र बोल सकते हैं। यह मंत्र तुलसी के आशीर्वाद प्राप्त करने, समृद्धि और सुख-समृद्धि के लिए बोला जाता है।
तुलसी को जल चढ़ाने का सही तरीका
तुलसी पूजन केवल जल चढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण नियम भी शामिल हैं। यदि आप तुलसी को विधिपूर्वक जल अर्पित करते हैं, तो उसका आध्यात्मिक और सकारात्मक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
- स्नान व स्वच्छता: सुबह स्नान के बाद ही तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए। साफ-सुथरी अवस्था में किया गया पूजन अधिक फलदायी माना जाता है।
- तांबे के पात्र से जल अर्पण: तांबे के कमंडलू या छोटे लोटे से जल अर्पित करना उत्तम माना गया है, क्योंकि तांबा शुद्धिकारी धातु है और तुलसी को यह अत्यंत प्रिय है।
- सूर्य की ओर मुख करके अर्पण: तुलसी को जल चढ़ाते समय पूर्व दिशा या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर मुख करके जल देना शुभ माना गया है।
- शाम को तुलसी को जल न दें: शास्त्रों में उल्लेख है कि तुलसी रात्रि में विश्राम अवस्था में रहती है; अतः शाम या रात को तुलसी में जल नहीं देना चाहिए।
- दीपक जलाना: यदि संभव हो तो जल चढ़ाने से पहले या बाद में तुलसी के पास घी या तेल का दीपक जलाएं। इससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
तुलसी को हाथ न लगाएं
तुलसी की पत्तियां बिना उचित नियमों के नहीं तोड़ी जाती हैं। पत्तियां रविवार, एकादशी, द्वादशी तथा शाम के बाद नहीं तोड़नी चाहिए। केवल पूजा या औषधीय उपयोग के लिए ही तोड़ी जानी चाहिए।
तुलसी पूजन का धार्मिक महत्व
पुराणों में वर्णन है कि तुलसी माता भगवान विष्णु की अति प्रिय हैं। तुलसी का एक पत्ता भी यदि विष्णु या कृष्ण की पूजा में अर्पित किया जाए, तो पूजा पूर्ण मानी जाती है। तुलसी का पौधा वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है और घर में शांति व पवित्रता का संचार करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी तुलसी हवा को शुद्ध करने में अत्यंत प्रभावी है। तुलसी का पौधा प्राकृतिक एंटीबायोटिक माना गया है। इसके समीप रहने से श्वसन संबंधी रोगों, सर्दी, संक्रमण आदि से रक्षा होती है। मां तुलसी को कर्मों को पवित्र करने वाली भी कहा जाता हैं। कहते हैं कि जो व्यक्ति रोज तुलसी को जल चढ़ाकर पूजा करता है, उसके जीवन से पाप, दुर्भाग्य और बाधाएं धीरे-धीरे दूर होती हैं।
तुलसी को मंत्र के साथ जल चढ़ाने के लाभ
- मानसिक शांति और ध्यान की वृद्धि: मंत्र उच्चारण के साथ तुलसी को जल देना मन को शांत करता है। इससे तनाव कम होता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक होती है।
- अशुभ प्रभावों से रक्षा: तुलसी में कई प्रकार की दिव्य ऊर्जा मानी गई है जो नकारात्मक शक्तियों और ग्रह दोषों को कम करती है।
- घर में सुख-समृद्धि: वास्तु के अनुसार तुलसी माता की पूजा से घर में धन, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
- इच्छाशक्ति मजबूत होती है: जो व्यक्ति नियमित रूप से तुलसी पूजन करता है, उसकी इच्छाशक्ति मजबूत होती है और मन में अनुशासन आता है।
तुलसी पूजा के साथ बोले जाने वाले अन्य उपयोगी मंत्र
यदि आप तुलसी की विस्तृत पूजा करना चाहते हैं, तो यह मंत्र भी पढ़ सकते हैं।
तुलसी प्रदक्षिणा मंत्र
“यन्मूलं सर्वतीर्थानि यन्नाभौ सर्वदेवताः। यदग्री सर्ववेदाश्च तुलसीं तां नमाम्यहम्॥”
तुलसी आरती
“जय तुलसी माता जय तुलसी माता। सबकी तुम भाग्य विधाता, जय तुलसी माता॥” ये मंत्र तुलसी पूजा को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।
तुलसी का धार्मिक महत्व
तुलसी को जल चढ़ाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि जीवन को सकारात्मकता, शांति और स्वास्थ्य से भर देने वाला सरल और प्रभावी उपाय है। चाहे आप आध्यात्मिक दृष्टि से तुलसी की पूजा करें या केवल उसके प्राकृतिक गुणों को समझते हुए, तुलसी हमेशा शुभ ही देती है। सुबह शुद्ध मन से “ॐ तुलसीदेव्यै नमः” मंत्र बोलकर यदि आप तुलसी को जल अर्पित करते हैं, तो न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि आपका मन भी शांत और शक्तिशाली बनता है। तुलसी माता की कृपा सदैव जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त करती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


