Hanuman Ji Ke Mantra Jaap Ka Niyam: हिंदू धर्म में श्रीराम भक्त हनुमान को संकटों से मुक्ति दिलाने वाला देवता माना गया है। इसलिए उन्हें संकटमोचन के नाम से भी जाना जाता है। जब जीवन में भय, बाधाएं, रोग, शत्रु या मानसिक तनाव बढ़ने लगता है, तब भक्त सबसे पहले हनुमान जी की शरण में जाते हैं। वे शक्ति, भक्ति, बुद्धि और सेवा के प्रतीक हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि हनुमान जी का मंत्र जाप करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और जीवन की कठिन राह आसान बनती है, लेकिन प्रश्न यह है कि हनुमान जी का कौन-सा मंत्र सभी संकटों को दूर करता है? और उस मंत्र का सही नियम, विधि और महत्व क्या है? आइए विस्तार से जानते हैं।
हनुमान जी का सबसे सरल, शक्तिशाली और सार्वकालिक मंत्र है “ॐ नमो भगवते हनुमते नमः” यह मंत्र हनुमान जी का मूल मंत्र माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यह मंत्र साधक को भय, शत्रु, नकारात्मक ऊर्जा, रोग और मानसिक अशांति से मुक्त करता है।
मंत्र का अर्थ
- ॐ – ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक
- नमो – नमन या समर्पण
- भगवते – दिव्य शक्ति
- हनुमते – हनुमान जी को
- नमः – पुनः नमन
अर्थात् मैं संकटमोचन हनुमान जी को पूर्ण श्रद्धा से नमन करता हूं।
कैसे दूर होते हैं सभी संकट?
हनुमान जी स्वयं रामभक्त, वीर, बलवान और बुद्धिमान हैं। यह मंत्र भय और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करता है। कोर्ट-कचहरी, शत्रु बाधा में लाभ देता है। ग्रह दोष, विशेषकर मंगल दोष और शनि दोष में सहायक है। मानसिक तनाव, अवसाद और अनिद्रा को कम करता है। आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है। इसके साथ ही कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करता है। इसीलिए हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है।
हनुमान मंत्र जाप के नियम (विधि)
मंत्र का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसे नियम और श्रद्धा के साथ किया जाए।
जाप का सही समय
- ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) सबसे उत्तम
- मंगलवार और शनिवार विशेष फलदायी
- संकट अधिक हो तो रोज़ जाप किया जा सकता है
जाप की संख्या
- प्रतिदिन 108 बार
- विशेष साधना के लिए 11, 21 या 41 दिन का अनुष्ठान
- गंभीर संकट में 1100 या 11,000 जाप
आसन और दिशा
- लाल या कुश का आसन
- मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर
- शांत और स्वच्छ स्थान चुनें
माला
- रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला
- माला को जमीन पर न रखें
- सुमेरु का उल्लंघन न करें
मंत्र जाप से पहले क्या करें?
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।
- सिंदूर, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें।
- मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें।
मंत्र जाप करते समय ध्यान रखें ये बातें
- जाप के दौरान क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से बचें।
- ब्रह्मचर्य और सात्त्विक आहार अपनाएं।
- झूठ, छल और बुरी संगति से दूरी रखें।
- साधना काल में मांस-मदिरा से परहेज करें।
हनुमान चालीसा और मंत्र का संबंध
हनुमान चालीसा स्वयं में एक महाशक्ति है, लेकिन यदि आप चालीसा के साथ “ॐ नमो भगवते हनुमते नमः” मंत्र का जाप करते हैं, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
विशेष उपाय:-
- पहले 1 बार हनुमान चालीसा
- फिर 108 बार मंत्र जाप
- अंत में “बजरंग बाण” का पाठ
किन लोगों को करना चाहिए मंत्र जाप
- जिनके जीवन में बार-बार संकट आते हैं
- जो डर, घबराहट या आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं
- जिन पर शनि या मंगल का दुष्प्रभाव है
- विद्यार्थी, सैनिक, खिलाड़ी और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी
- जिनका कार्य बार-बार अटक जाता है
मंत्र जाप के चमत्कारी लाभ
- मन शांत और स्थिर होता है।
- निर्णय क्षमता बढ़ती है।
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- ईश्वर में आस्था मजबूत होती है।
- जीवन में सुरक्षा कवच बनता है।
कहा गया है “नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।”
हनुमान जी का मंत्र “ॐ नमो भगवते हनुमते नमः” केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और ऊर्जा का संगम है। यदि इसे नियम, संयम और भक्ति के साथ किया जाए, तो जीवन का कोई भी संकट स्थायी नहीं रह सकता। हनुमान जी सच्चे भक्त की कभी परीक्षा नहीं लेते, बल्कि संकट में उसे पहले संभालते हैं।
हनुमान मंत्र का महत्व
जीवन में आने वाले संकट मनुष्य को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से कमजोर कर देते हैं। जब समस्याएं बढ़ने लगती हैं और समाधान दिखाई नहीं देता, तब आस्था ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। हिंदू धर्म में संकटमोचन हनुमान जी को सभी कष्टों को दूर करने वाला देवता माना गया है। वे अद्भुत शक्ति, अटूट भक्ति और निडरता के प्रतीक हैं। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि हनुमान जी के मंत्रों का नियमित जाप भय, रोग, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है। विशेष रूप से यह एक ऐसा मंत्र है, जिसे सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक जपने से जीवन के बड़े-से-बड़े संकट भी दूर होने लगते हैं।
जय बजरंगबली!
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


