Navratri Kanya Pujan Ke Niyam: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व देवी दुर्गा की साधना और शक्ति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। शास्त्रों और पुराणों में वर्णन मिलता है कि नवरात्रि की पूजा कन्या पूजन (कन्या भोज) के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी कारण आठवें या नौवें दिन कन्याओं को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराना, उनका पूजन करना और उन्हें उपहार स्वरूप वस्त्र, फल, मिठाई, दक्षिणा आदि प्रदान करना परंपरा बन गई है।
यह परंपरा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि नवरात्रि में कन्या पूजन का क्या महत्व है, इसमें क्या नियम माने जाते हैं और कन्याओं को क्या खिलाना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्त को सुख, समृद्धि और संतानों की रक्षा का आशीर्वाद देती हैं। नवरात्रि में उपवास और पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कन्या पूजन न हो। मार्कण्डेय पुराण और देवी भागवत पुराण में कन्या पूजन का वर्णन है। यहां कन्याओं को नवदुर्गा का प्रतीक माना गया है। कन्याओं का सम्मान करना समाज को यह शिक्षा देता है कि नारी शक्ति की पूजा और रक्षा करना आवश्यक है।
कन्या पूजन के नियम | Kanya Pujan Ke Niyam
कन्या पूजन में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिन्हें पालन करना जरूरी माना गया है।
- कितनी कन्याएं बुलानी चाहिए: परंपरा के अनुसार कम से कम 1 और अधिकतम 9 कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए। कई जगह पर 11 या 21 कन्याओं को भी बुलाने की प्रथा है।
- आयु सीमा: पूजा के लिए जिन कन्याओं को बुलाया जाता है, उनकी आयु 2 वर्ष से 10 वर्ष तक होनी चाहिए। इन कन्याओं को ‘कुमारी’ माना जाता है।
- कन्याओं के साथ एक लांगूर: कन्या पूजन में प्रथा है कि कन्याओं के साथ एक छोटे लड़के (लांगूर) को भी शामिल किया जाता है। इसे भगवान हनुमान का प्रतीक माना जाता है।
- पूजन विधि: सबसे पहले कन्याओं के पांव धोकर उन्हें आसन पर बैठाया जाता है। फिर उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है और उनके चरणों में फूल चढ़ाकर पूजा की जाती है।
- भोजन और दक्षिणा: कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें फल, मिठाई, नारियल, दक्षिणा और उपहार देकर विदा किया जाता है।
कन्याओं को क्या खिलाएं? | Kanya Ko Kya Khilayen
कन्या पूजन में विशेष प्रकार के भोजन की व्यवस्था की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यह भोजन मां दुर्गा को अर्पित करने जैसा फल प्रदान करता है।
- पूड़ी: गेहूं के आटे की बनी ताज़ा पूड़ियां कन्याओं को खिलाई जाती हैं।
- काला चना: उबले और मसालेदार काले चने का भोग सबसे पवित्र और प्रिय माना जाता है।
- सूजी का हलवा: घी, दूध और सूजी से बना हलवा कन्या पूजन का मुख्य प्रसाद होता है।
- नारियल और फल: मिठास और शुद्धता का प्रतीक माने जाने वाले नारियल के टुकड़े और मौसमी फल भी परोसे जाते हैं।
- पानी और मिठाई: कन्याओं को मीठा खिलाना विशेष शुभ माना जाता है, इसलिए रसगुल्ला, लड्डू या घर में बनी मिठाई दी जा सकती है।
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धार्मिक मान्यता और आस्था | Dharmik Manyta or Aastha
- नवदुर्गा का प्रतीक: नवरात्रि के दौरान हर कन्या को नवदुर्गा का एक स्वरूप माना जाता है। उन्हें भोजन कराना देवी को प्रसन्न करने जैसा है।
- पाप का क्षय: शास्त्रों में कहा गया है कि कन्या पूजन से पापों का क्षय होता है और मनुष्य के जीवन में शांति आती है।
- धन-धान्य की वृद्धि: जो व्यक्ति श्रद्धा से कन्या पूजन करता है, उसके घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती।
- संतान सुख: संतान प्राप्ति की कामना करने वाले दंपत्ति के लिए कन्या पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।
आधुनिक समय में महत्व | Mahatva
आज के दौर में कन्या पूजन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं रहा, बल्कि यह समाज में बेटी और नारी के सम्मान का प्रतीक बन गया है। कन्या पूजन का वास्तविक संदेश यही है कि कन्याओं और महिलाओं का आदर किया जाए और उन्हें देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाए। कई सामाजिक संस्थाएं भी नवरात्रि के अवसर पर अनाथालयों, बालिकाओं के विद्यालयों और गरीब परिवारों की बच्चियों को आमंत्रित कर कन्या पूजन का आयोजन करती हैं। यह परंपरा समाज में बराबरी और सशक्तिकरण का संदेश देती है।
कन्या पूजन में भूल से भी न करें ये गलतियां | Na Karen Ye Kaam
- कन्याओं को खाली हाथ न भेजें: भोजन कराने के बाद उन्हें उपहार या दक्षिणा अवश्य दें।
- बासी भोजन न खिलाएं: कन्याओं को केवल ताजा और शुद्ध भोजन ही परोसें।
- असम्मान न करें: पूजा के समय कन्याओं से रूखा व्यवहार करना या उनका अपमान करना अशुभ माना जाता है।
- नियमों की अनदेखी न करें: कन्या पूजन सही विधि और श्रद्धा से करना चाहिए, केवल औपचारिकता निभाना उचित नहीं है।
- अधिक दिखावा न करें: कन्या पूजन में भव्यता से अधिक महत्वपूर्ण है भाव और आस्था।
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कन्या पूजन की परंपरा | Kanya Pujan Ki Parampara
नवरात्रि में कन्या पूजन की परंपरा धर्म, संस्कृति और आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है। इसमें कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा और भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि पूड़ी, चना और हलवे का भोग सबसे शुभ और पूर्ण माना जाता है। नियम यह है कि छोटी आयु की कन्याओं को आदरपूर्वक बुलाकर उनका पूजन, भोजन और सम्मान करना चाहिए।
कन्या पूजन हमें यह शिक्षा देता है कि नारी शक्ति का सम्मान ही वास्तविक शक्ति की उपासना है। जब हम कन्याओं को देवी मानकर उनकी सेवा करते हैं, तो यह हमारे जीवन में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति लेकर आता है। यही कारण है कि नवरात्रि के बिना कन्या पूजन अधूरा माना जाता है।



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