Shardiya Navratri Kalash Sthapana Vidhi: भारत की संस्कृति और परंपरा में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व साल में दो बार आता है – चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। इनमें से शारदीय नवरात्रि को शक्ति उपासना का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और घर-घर में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है।
माना जाता है कि यदि शारदीय नवरात्रि के पहले दिन विधिवत कलश स्थापना की जाए, तो पूरे साल घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है। आइए जानते हैं कलश स्थापना की सही विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
शारदीय नवरात्रि का महत्व
शारदीय नवरात्रि आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तक चलती है। यह पर्व विशेष रूप से मां दुर्गा को समर्पित है और इसे शक्ति आराधना का समय कहा गया है। नवरात्रि में की गई पूजा से घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दौरान भक्तजन उपवास रखते हैं, देवी की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करते हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन करते हैं।
कलश स्थापना का महत्व
- कलश को हिंदू धर्म में सृष्टि का प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार, कलश में सभी देवी-देवताओं का वास होता है।
- नवरात्रि में कलश स्थापना का अर्थ है कि हम देवी शक्ति को अपने घर और जीवन में आमंत्रित कर रहे हैं।
- कलश में जल, सुपारी, अनाज और सिक्के डालकर इसे मां लक्ष्मी, विष्णु और दुर्गा का प्रतीक माना जाता है।
- यह धन, आरोग्य और समृद्धि का सूचक है।
- माना जाता है कि कलश स्थापना से घर में लक्ष्मी का वास होता है और संकट दूर होते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2025: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि हर साल आश्विन मास की प्रतिपदा से शुरू होती है। कलश स्थापना के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त या ब्रह्म मुहूर्त में स्थापना करना उत्तम रहता है। कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त अपने ज्योतिषी या पंडित से अवश्य पूछ लें।
कलश स्थापना की तैयारी
कलश स्थापना से पहले भक्तों को कुछ चीजों की व्यवस्था करनी होती है।
आवश्यक सामग्री
- मिट्टी का कलश (तांबे या पीतल का भी हो सकता है)
- स्वच्छ जल
- आम या अशोक के पत्ते
- नारियल
- रोली, हल्दी और चावल
- सुपारी और सिक्के
- लाल या पीला कपड़ा
- जौ या गेहूं की मिट्टी
- कलावा (मौली)
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कलश स्थापना की विधि
स्थान का चुनाव
कलश स्थापना के लिए पूजा घर या उत्तर-पूर्व दिशा का कोना सबसे शुभ माना जाता है। जगह को अच्छे से साफ करें और गंगाजल से शुद्ध करें।
वेदी तैयार करना
लकड़ी के पट्टे पर लाल कपड़ा बिछाएं। इस पर थोड़ी सी मिट्टी रखें और उसमें जौ या गेहूं बो दें।
कलश को सजाना
कलश में स्वच्छ जल भरें और उसमें सुपारी, सिक्के, रोली और हल्दी डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते रखें। ऊपर से नारियल को लाल कपड़े और मौली से बांधकर स्थापित करें।
देवी का आह्वान
कलश को जौ बोई हुई मिट्टी पर स्थापित करें। मां दुर्गा का ध्यान करें और मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजा करें।
अखंड ज्योति प्रज्वलित करना
कलश स्थापना के साथ ही अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है। यह पूरे नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए, इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दौरान विशेष सावधानियां
कलश को एक बार स्थापित करने के बाद उसे हिलाना-डुलाना नहीं चाहिए। पूजा के स्थान पर हमेशा साफ-सफाई रखें। अखंड ज्योति को बुझने न दें। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की क्रमशः पूजा करें।
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धार्मिक मान्यता
- शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना से जुड़े कई धार्मिक महत्व बताए गए हैं।
- मां दुर्गा का वास: मान्यता है कि कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा स्वयं उस स्थान पर निवास करती हैं।
- पापों का नाश: पूजा से जीवन के संकट और पाप दूर होते हैं।
- समृद्धि का वास: घर में धन-धान्य और खुशहाली आती है।
आधुनिक दृष्टिकोण
- धार्मिक मान्यता के अलावा नवरात्रि और कलश स्थापना का सामाजिक व वैज्ञानिक महत्व भी है।
- इस दौरान घर में स्वच्छता और सकारात्मक माहौल बनता है।
- दीपक और मंत्र जाप से वातावरण में शांति और मानसिक ऊर्जा का संचार होता है।
- सामूहिक भजन-कीर्तन से समाज में एकता और भाईचारा बढ़ता है।
जानें क्या है मान्यता
शारदीय नवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है। पहले दिन की कलश स्थापना इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग है। यदि इसे विधिपूर्वक किया जाए तो जीवन में खुशहाली, धन और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए इस बार शारदीय नवरात्रि के पहले दिन सही विधि से कलश स्थापना करें और मां दुर्गा की कृपा से अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर दें।



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