Surya Grahan Ke Niyam: सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) को लेकर भारत में धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से विशेष मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। जहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, वहीं धर्म और परंपरा के अनुसार, इसे शुभ-अशुभ फल देने वाला समय माना जाता है। खासकर गर्भवती महिलाओं को सूर्यग्रहण के समय कई सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान लापरवाही मां और गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। आज हम विस्तार से जानेंगे कि सूर्यग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके पीछे धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक कारण क्या हैं, और आधुनिक दृष्टिकोण इस विषय को कैसे देखता है।
सूर्यग्रहण क्या है?
सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी पूरी तरह या आंशिक रूप से पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती हैं। यह दृश्य अद्भुत तो होता है लेकिन इसके प्रभाव को लेकर प्राचीन समय से ही कई मान्यताएं चली आ रही हैं। हिंदू धर्म में सूर्यग्रहण को सूतक काल माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं को इस समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
इन बातों का रखें खास ध्यान
ग्रहण के समय घर के भीतर रहें
गर्भवती महिलाओं को सूर्यग्रहण के दौरान घर के अंदर ही रहना चाहिए। बाहर निकलने से शरीर पर हानिकारक विकिरण का असर हो सकता है।
नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करें
परंपरा के अनुसार, इस दौरान सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से बच्चे के शरीर पर कट या जन्मचिह्न पड़ सकते हैं।
खाना-पीना वर्जित
सूर्यग्रहण के समय भोजन बनाना या खाना मना माना जाता है। ग्रहण के असर से भोजन अस्वच्छ या दूषित हो सकता है। गर्भवती महिलाएं ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लें।
तुलसी पत्र का उपयोग
मान्यता है कि ग्रहण के समय घर के खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी पत्ते डाल देने से भोजन सुरक्षित रहता है।
मंत्र जाप और प्रार्थना
इस समय धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मंत्र जाप, प्रार्थना और ध्यान करने से नकारात्मक प्रभाव कम होता है। गर्भवती महिलाएं इस दौरान भगवान का स्मरण करें।
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क्या कहते हैं वैज्ञानिक
धार्मिक मान्यताएं अपनी जगह हैं, लेकिन आधुनिक विज्ञान सूर्यग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना मानता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्यग्रहण के दौरान पराबैंगनी (UV) किरणें सामान्य से अधिक हानिकारक हो सकती हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिना सुरक्षात्मक उपाय के बाहर नहीं निकलना चाहिए। गर्भवती महिलाएं भावनात्मक रूप से संवेदनशील होती हैं। सूर्यग्रहण के समय फैली अंधकारमय स्थिति तनाव या बेचैनी बढ़ा सकती है। लंबे समय तक भोजन खुले में रखने से उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसी कारण ग्रहण के समय खाना न खाने की परंपरा बनी।
गर्भवती महिलाएं क्या करें
सूर्य ग्रहण के दौरान कमरे में आराम करें और अनावश्यक काम से बचें। सूर्य की सीधी रोशनी घर में न आने दें। परदे खींचकर रखें। ग्रहण शुरू होने से पहले ही हल्का और सुपाच्य भोजन कर लें। सकारात्मक सोचें, ध्यान करें या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें। इस दौरान भारी सामान उठाने या अधिक शारीरिक परिश्रम से बचें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि गर्भवती महिलाओं पर सूर्यग्रहण का गहरा असर पड़ता है। इसलिए कठोर नियम बनाए गए हैं। विकिरण और मानसिक तनाव के कारण गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टर मानते हैं कि गर्भवती महिलाओं को सूर्यग्रहण के दौरान सीधी धूप से बचना चाहिए, आराम करना चाहिए और खुद को सुरक्षित वातावरण में रखना चाहिए।
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बच्चों की सेहत पर असर
गर्भावस्था के दौरान मां का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सीधे बच्चे की सेहत को प्रभावित करता है। इसलिए सूर्यग्रहण जैसे समय पर यदि गर्भवती महिलाएं सावधानी बरतेंगी, तो शिशु का विकास सुरक्षित और स्वस्थ रहेगा। मां की मानसिक शांति से बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ग्रहण से पहले पौष्टिक भोजन लेना और जल का ध्यान रखना बच्चे की सेहत को लाभ पहुंचाता है। तनाव कम रखने से गर्भस्थ शिशु का विकास बेहतर होता है।
भारतीय परंपरा में महत्व
सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन भारतीय परंपरा में इसे गहन धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा गया है। खासकर गर्भवती महिलाओं को इस समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से यह नकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है, वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण कहता है कि सूर्यग्रहण के समय विकिरण और मानसिक प्रभाव हानिकारक हो सकते हैं।



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