Vasant Panchami Puja Mantra Niyam: वसंत पंचमी हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को देशभर में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा से मनाई जाती है। यह दिन विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ यह पर्व जीवन में नवीनता, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और ज्ञान साधकों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान, एकाग्रता, स्मरण शक्ति और रचनात्मकता में वृद्धि होती है। नीचे वसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा का महत्व, पूजा विधि, नियम और प्रमुख मंत्रों का अर्थ सहित विस्तृत वर्णन प्रस्तुत है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्मा जी ने सृजन किया, तब चारों ओर मौन और जड़ता थी। तब ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती को प्रकट किया और वीणा के मधुर नाद से संसार में शब्द, स्वर और ज्ञान का संचार हुआ। इसी कारण मां सरस्वती को वाणी, विद्या और बुद्धि की देवी कहा जाता है। वसंत पंचमी का दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह ज्ञानारंभ का शुभ मुहूर्त माना जाता है। छोटे बच्चों को इस दिन पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है, जिसे विद्यारंभ संस्कार कहा जाता है। पीले रंग का विशेष महत्व है, जो समृद्धि, ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
मां सरस्वती पूजा की विधि (पूजा विधि)
वसंत पंचमी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। पूजा की विधि इस प्रकार है…
- पूजा स्थान को स्वच्छ करें और पीले वस्त्र पर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- मां सरस्वती को श्वेत या पीले पुष्प अर्पित करें।
- केसर या हल्दी से तिलक करें।
- धूप, दीप, अगरबत्ती जलाएं।
- मां को पीले फल, बेसन के लड्डू, खीर या मीठे चावल का भोग लगाएं।
- पुस्तकों, वाद्य यंत्रों और लेखन सामग्री को मां के चरणों में रखें।
- इसके बाद विधिपूर्वक मंत्रों का जाप करें।
पूजा के नियम (पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें)
- इस दिन सात्विक भोजन करें और तामसिक भोजन से बचें।
- वाणी में मधुरता रखें, झूठ और कटु वचन न बोलें।
- ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें।
- विद्या और ज्ञान से संबंधित वस्तुओं का अपमान न करें।
- संभव हो तो मौन रहकर ध्यान और जप करें।
मां सरस्वती के प्रमुख मंत्र (अर्थ सहित)
1. सरस्वती वंदना मंत्र
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्डमण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥
अर्थ: जो कुंद के फूल, चंद्रमा और हिम के समान श्वेत हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथों में वीणा शोभायमान है, जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं और जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश सदैव वंदित करते हैं—वही मां सरस्वती मेरी अज्ञानता को नष्ट करें।
2. बीज मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
अर्थ: यह मंत्र मां सरस्वती के बीज स्वरूप का मंत्र है। “ऐं” ज्ञान, बुद्धि और वाणी का प्रतीक है। इस मंत्र के जाप से स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
3. विद्या प्राप्ति मंत्र
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
अर्थ: हे मां सरस्वती! आपको नमस्कार है। आप वरदान देने वाली और इच्छानुसार रूप धारण करने वाली हैं। मैं विद्या का आरंभ कर रहा/रही हूं, मेरी साधना सदैव सफल हो।
4. ज्ञान वृद्धि मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः॥
अर्थ: यह मंत्र बुद्धि, वाणी और आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि करता है। “श्रीं” समृद्धि और “ह्रीं” दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।
5. विद्यार्थी विशेष मंत्र
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
अर्थ: विद्या से विनय आता है, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और अंततः धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।
मंत्र जाप का समय और संख्या
वसंत पंचमी के दिन प्रातः काल या ब्राह्म मुहूर्त में मंत्र जाप करना सर्वोत्तम माना जाता है।
- बीज मंत्र का जाप 108 बार करें।
- सरस्वती वंदना कम से कम 3 या 11 बार पढ़ें।
- मंत्र जाप के बाद मां से ज्ञान, सद्बुद्धि और सफलता की प्रार्थना करें।
वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
पीला रंग वसंत, सरसों के फूल, सूर्य की ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पीले वस्त्र धारण करने और पीला भोजन करने से जीवन में उत्साह और ज्ञान की वृद्धि होती है।
वसंत पंचमी मंत्र जाप का महत्व
वसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, कला और चेतना का उत्सव है। मां सरस्वती की कृपा से मनुष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर होता है और विवेक का प्रकाश फैलता है। यदि इस दिन श्रद्धा, शुद्धता और नियमपूर्वक पूजा कर मंत्रों का जाप किया जाए, तो विद्यार्थी जीवन में सफलता, कलाकारों को सृजनात्मक ऊर्जा और साधकों को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। मां सरस्वती से यही प्रार्थना है कि वे हम सभी को सद्बुद्धि, मधुर वाणी और सत्य ज्ञान प्रदान करें।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


