Vijaya Ekadashi Vrat Food Niyam: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष में आने वाली सभी एकादशियों में विजया एकादशी का स्थान अत्यंत पुण्यदायी है। यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है और भगवान विष्णु को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है, शत्रुओं पर जीत मिलती है और जीवन के संकट दूर होते हैं। यही कारण है कि इस व्रत को “विजया” कहा गया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि विजया एकादशी के व्रत में क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, व्रत की विधि, नियम, महत्व और पारण का सही तरीका क्या है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले विजया एकादशी का व्रत किया था। ऋषि बकदालभ्य के सुझाव पर श्रीराम और वानर सेना ने इस व्रत को विधिपूर्वक किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई। तभी से यह मान्यता है कि यह व्रत असंभव कार्यों को भी संभव बना देता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो:-
- किसी मुकदमे या विवाद में फंसे हों
- शत्रुओं से परेशान हों
- करियर, परीक्षा या व्यवसाय में सफलता चाहते हों
- मानसिक तनाव और नकारात्मकता से मुक्त होना चाहते हों
विजया एकादशी व्रत की विधि
व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से होती है।
दशमी के दिन
- दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करें
- तामसिक भोजन जैसे मांस, लहसुन, प्याज से दूर रहें
- रात में भूमि पर शयन करें
- मन, वचन और कर्म से संयम रखें
एकादशी के दिन
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान विष्णु का ध्यान करें
- व्रत का संकल्प लें
- दिनभर उपवास रखें या फलाहार करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
विजया एकादशी के व्रत में क्या खाएं
व्रत के दौरान भोजन पूरी तरह सात्विक और शुद्ध होना चाहिए। यदि आप निर्जल व्रत नहीं कर रहे हैं, तो नीचे दिए गए खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं:
1. फल और सूखे मेवे
- सेब, केला, पपीता, अनार
- नारियल
- किशमिश, खजूर, बादाम
2. कंद-मूल
- शकरकंद
- अरबी
- आलू
(ध्यान रखें कि इन्हें केवल सेंककर या सेंधा नमक में पकाया जाए)
3. व्रत में उपयोग होने वाले अनाज
- साबूदाना
- कुट्टू का आटा
- सिंघाड़े का आटा
- राजगिरा
इनसे आप खिचड़ी, पूरी, पराठा या हलवा बना सकते हैं।
4. दुग्ध उत्पाद
- दूध
- दही
- छाछ
- माखन
- घी
5. मसाले (सीमित मात्रा में)
- सेंधा नमक
- काली मिर्च
- जीरा
- हरी मिर्च
विजया एकादशी के व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए
व्रत की पूर्णता के लिए कुछ चीज़ों से पूरी तरह परहेज करना आवश्यक है।
1. अनाज और दालें
- गेहूं
- चावल
- मूंग, अरहर, चना, मसूर आदि सभी दालें
2. तामसिक भोजन
- मांस, मछली, अंडा
- शराब और अन्य नशीले पदार्थ
3. कुछ सब्ज़ियां
- प्याज
- लहसुन
- मशरूम
- बैंगन
4. सामान्य नमक
व्रत में साधारण नमक वर्जित होता है, केवल सेंधा नमक ही प्रयोग करें।
विजया एकादशी व्रत के नियम
- व्रत के दिन झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- किसी का अपमान न करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- दिन में सोने से बचें।
- जितना संभव हो भगवान विष्णु का स्मरण करें।
विजया एकादशी व्रत का पारण कैसे करें
व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है।
- द्वादशी की सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन और दान दें।
- इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- सबसे पहले तुलसी दल के साथ जल या फल लें।
ध्यान रखें कि एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही पारण कर लेना चाहिए।
विजया एकादशी व्रत के लाभ
- जीवन में सफलता और विजय प्राप्त होती है।
- शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
- पापों का नाश होता है।
- मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ता है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
ईश्वर भक्ति का माध्यम
विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि, संयम और ईश्वर भक्ति का माध्यम है। यदि श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ इस व्रत को किया जाए तो जीवन के कठिन से कठिन संकट भी दूर हो सकते हैं। सही आहार, शुद्ध विचार और विधिपूर्वक पूजा ही इस व्रत की सफलता की कुंजी है। शास्त्रों में वर्णित विधि और नियमों के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। श्रद्धा, विश्वास और शुद्ध आचरण के साथ किया गया यह व्रत जीवन की कठिनाइयों में विजय का मार्ग प्रशस्त करता है।
एकादशी व्रत का महत्व
पुराणों के अनुसार, इस व्रत का उल्लेख पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को सांसारिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विजय भी प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों द्वारा किया जाता है जो लंबे समय से संघर्ष, रोग, शत्रु बाधा या मानसिक तनाव से जूझ रहे हों। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यह व्रत पापों के नाश के साथ-साथ मन की अशुद्धियों को भी दूर करता है और व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर अग्रसर करता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।


