Vishwakarma Puja Vidhi: घर में इस विधि से करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा, जीवन में नहीं आएंगे संकट!

Vishwakarma Puja Parampara: भगवान विश्वकर्मा की पूजा लोगों को संदेश देती है कि जीवन की सफलता केवल भाग्य से नहीं, बल्कि परिश्रम और सद्बुद्धि से मिलती है।

Bhagwan Vishwakarma Puja Vidhi

Vishwakarma Puja Ka Mahatva: सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला इंजानियर और दिव्य वास्तुकार माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब स्वर्गलोक के महलों से लेकर रावण की लंका, इंद्रप्रस्थ और द्वारका जैसी नगरी का निर्माण उन्हीं के हाथों से हुआ था। हर साल आश्विन मास की सूर्य संक्रांति तिथि (आमतौर पर 17 या 18 सितंबर) को विश्वकर्मा पूजा की जाती है। इस दिन घर, कारखानों, औजारों और दफ्तरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से जीवन में कोई संकट नहीं आता है और कार्यक्षेत्र में भी लोगों को सफलता प्राप्त होती है। आइए जानते हैं घर में विश्वकर्मा पूजा की सही विधि, नियम और इसका धार्मिक महत्व।

पुराणों में वर्णन है कि भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पकार थे। उन्हें “देव शिल्पी” और “विश्वकर्मा महर्षि” भी कहा जाता है। उन्होंने त्रिपुरासुर का विनाश करने के लिए भगवान शिव के लिए पिनाक धनुष बनाया था। रावण की लंका, पांडवों का इंद्रप्रस्थ और भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी उन्हीं की देन थी। भगवान विश्वकर्मा को श्रम, तकनीक और कला का अधिष्ठाता देवता माना जाता है।

घर में विश्वकर्मा पूजा की तैयारी

  • शुद्धि: पूजा से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें।
  • स्नान: व्रती को प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनने चाहिए।
  • स्थान चयन: तुलसी चौरा या पूजन स्थल पर स्वच्छ आसन बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • सामग्री: पूजा के लिए फूल, अक्षत, रोली, दीपक, धूप, तुलसी, नारियल, पान, सुपारी, पंचामृत, मौसमी फल और भोग की व्यवस्था करें।
  • औजार और उपकरण: घर-परिवार के सभी औजार, वाहन और कार्य से जुड़े उपकरणों को पूजा स्थल पर रखें।

विश्वकर्मा पूजा की विधि

आवाहन और संकल्प

  1. पूजन स्थल पर बैठकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और संकल्प लें कि “मैं भगवान विश्वकर्मा की आराधना कर रहा हूं, संकट निवारण और परिवार की सुख-समृद्धि हेतु।”
  2. हर शुभ कार्य की तरह सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। उन्हें मोदक, दूर्वा और फूल अर्पित करें।
  3. भगवान विश्वकर्मा के चित्र या प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करें और अक्षत, रोली, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
  4. धूप-दीप जलाकर आरती करें और नैवेद्य के रूप में फल, मिठाई और पंचामृत अर्पित करें।
  5. घर, दफ्तर या काम से जुड़े उपकरण, मशीनें, वाहन आदि पर अक्षत, रोली और फूल चढ़ाएं। मान्यता है कि इससे कार्यक्षेत्र में उन्नति और सुरक्षा मिलती है।

हवन और मंत्रजाप

यदि संभव हो तो परिवार सहित छोटा हवन करें और भगवान विश्वकर्मा का मंत्र जपें-

  • ॐ आधारशक्तये नमः।
  • ॐ कृत्स्नविताय नमः।
  • ॐ विश्वकर्मणे नमः।

धार्मिक मान्यता है कि मंत्र उच्चारण से देवता प्रसन्न होते हैं और साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भगवान विश्वकर्मा के मंत्र जाप से कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

विश्वकर्मा पूजा में विशेष नियम

  • इस दिन मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है।
  • घर में सात्विक भोजन ही बनाएं और सब मिलकर ग्रहण करें।
  • झगड़ा, आलस्य और अपवित्रता से दूर रहें।
  • श्रमिकों, कर्मचारियों या जरूरतमंदों को भोजन और दान दें।

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विश्वकर्मा पूजा का महत्व

मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा करने से अचानक आने वाले संकट दूर होते हैं। कामकाज में उन्नति, व्यापार में लाभ और नौकरी में तरक्की मिलती है। घर में शांति, सुख और आपसी सद्भाव बना रहता है। औजारों और मशीनों की सुरक्षा होती है और दुर्घटनाओं का भय कम होता है।

पौराणिक मान्यता

पुराणों के अनुसार, जब त्रिपुरासुर नामक राक्षस ने तीन नगर बनाकर देवताओं को कष्ट दिया, तब भगवान विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए एक दिव्य धनुष और रथ का निर्माण किया। उसी धनुष से भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया और देवताओं को राहत मिली। इसी कारण भगवान विश्वकर्मा को संकट निवारक और रक्षक देवता माना जाता है।

घर-परिवार में विश्वकर्मा पूजा का संदेश

आज के युग में जहां विज्ञान और तकनीक पर समाज निर्भर है, वहां विश्वकर्मा पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह पूजा हमें यह सिखाती है कि श्रम और कौशल ही जीवन की वास्तविक संपत्ति है। जो व्यक्ति मेहनत और ईमानदारी से काम करता है, भगवान विश्वकर्मा सदैव उसकी रक्षा करते हैं। इस दिन घर, कारखानों, दफ्तरों और औजारों की विशेष पूजा की जाती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने से जीवन में समृद्धि आती है और कार्यों में सफलता मिलती है।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा केवल औद्योगिक क्षेत्रों या दफ्तरों तक सीमित नहीं है। घर में विधिपूर्वक पूजा करने से परिवार की उन्नति होती है और जीवन के हर संकट से रक्षा होती है। इस दिन औजारों और मशीनों के साथ-साथ अपनी मेहनत और कर्म का भी आदर करना चाहिए। भगवान विश्वकर्मा की कृपा से ही हमारे प्रयास फलदायी होते हैं और परिवार सुख-समृद्धि की ओर अग्रसर होता है।

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